‘परिधि हिंदी व्याकरण’ कक्षा 1-8 प्रस्तुत करते हुए हमें अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है। इस श्रृंखला में हमने सतत् विकास लक्ष्य (SDGs) का एक आदर्श मिश्रण शामिल किया है, जो पर्यावरण, आर्थिक और सामाजिक आयामों का संयोजन है। इस श्रृंखला का निर्माण ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ के अंतर्गत दिशानिर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए अध्ययन को शिक्षाप्रद और रोमांचक बनाने के उद्देश्य से किया गया है। इस श्रृंखला के अंतर्गत 21वीं सदी के कौशल; जैसे- गहन चिंतन, संचार कौशल, संप्रेषणात्मकता, कला समेकन, वैचारिक शिक्षा, अनुभव आधारित ज्ञान, भारत का ज्ञान, बहुविषयक शिक्षा, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य तथा जीवन कौशल सम्मिलित हैं।

प्रस्तुतश्रृंखला की कतिपय विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • इस श्रृंखला में व्याकरण के नियम सरल व सुबोध उदाहरण के रूप में दिए गए हैं।
  • कल्पना-शक्ति जागृत करने हेतु आकर्षक, भावपूर्ण तथा सारगर्भित चित्रांकन दिया गया है।
  • अनुच्छेदों, पत्रों व निबंधों की विषय-वस्तु रोचक है।
  • विषय-सामग्री से संबंधित जानकारी आओ दोहराएँ खंड द्वारा देने का प्रयास किया गया है।
  • प्रसंगानुसार मौखिक अभिव्यक्ति के विकास हेतु प्रत्येक पाठ के अभ्यास के बताइए ज़रा खंड में कुछ मौखिक प्रश्नों का समावेश किया गया है।
  • पाठ पर आधारित मूल्यांकन के लिए उपयोगी आओ अभ्यास करें खंड, जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रश्न सम्मिलित हैं। अब करके सीखें एक ऐसा खंड है, जिसके द्वारा छात्र स्वयं विभिन्न क्रियाकलापों को करके सीखते हैं।
  • आओ बात करें के माध्यम से बच्चों के वाचन कौशल को संवर्धित करने का प्रयास किया गया है।
  • सुनकर बताइए खंड द्वारा बच्चों में सुनकर लिखने की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया गया है ताकि विषय से संबंधित छात्रों की समझ का मूल्यांकन किया जा सके।
  • पाठ के मूलभाव से संबंधित जीवन कौशल पाठ के अंत में दिया गया है, जो एक शिक्षाप्रद उद्धरण या संदेश है।
Paridhi Vykaran part 1 Paridhi Vykaran part 2 Paridhi Vykaran part 3
ISBN 978-81-966462-5-7 ISBN 978-81-966462-2-6 ISBN 978-81-966462-8-8
MRP  170 MRP  190 MRP  210

 

Paridhi Vykaran part 4 Paridhi Vykaran part 5 Paridhi Vykaran part 6
ISBN 978-81-966462-4-0 ISBN 978-81-966462-6-4 ISBN 978-81-966462-7-1
MRP  230 MRP  250 MRP  290

 

Sea Shell Grammar part 7 Sea Shell Grammar part 8
ISBN 978-81-966734-4-4 ISBN 978-81-966734-0-6
MRP  310 MRP  330